मेरा देश फूल सा मेहके

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॥ पावन पाठ ॥

फिर दाल दाल पर सोने की चिड़िया ओ बाबा चहके

मेरा देश फूल सा मेहके मेरा देश फूल सा मेहके

हे अजर अमर अविनाशी बाबा लीले चढ़कर आओ

जिस ज्ञान को हम सब भूल गए वो ज्ञान हमें सिखलाओ

फिर भारत बन कर जगतगुरु साड़ी दुनिया में चमके

मेरा देश फूल सा मेहके मेरा देश फूल सा मेहके

जो दानव बनकर घूम रहे उन सबको मार गिराओ

उठाओ धनुष खेंचो कमान अब अपना बाण चलाओ

कोई भी दानव तीर से तेरे जा ना पाए बचके

मेरा देश फूल सा मेहके मेरा देश फूल सा मेहके

इतनी शक्ति दो श्याम हमें की मान ले ये जग सारा

भारत वासी खुशहाल रहें लहराए तिरंगा प्यारा

कर दास अजय यह विनती तेरे चरणों में सर धरके

मेरा देश फूल सा मेहके मेरा देश फूल सा मेहके

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।