जब जब विपदा आई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

धुन- छुप गए सारे नज़ारे

जब जब, विपदा आई, बाबा साथ आ गया,

मेरे सिर पे, साँवरिया का, हाथ आ गया

जय हो ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

दुःख ने सताया, नहीं घबराया,

साँवरा सलोना पास आया

मेरे पल पल, का यह, हिसाब करे,

सच्च मेरे, साँवरिया, सारे ख्वाब करे

जो भी लड़ने आया, वही मात खा गया ,

मेरे सिर पे, साँवरिया का, हाथ आ गया

जब जब, विपदा आई,,,,,,,,,,,,,,,,

गम की घटाएं, जो घिर घिर आएं,

साँवरे से डर डर जाएं

इनके होते, गमों का, नहीं ज़ोर चले,

गम यूँ कहते, आ जाओ, कहीं और चले

जिसने अकड़ दिखाई, इनसे लात खा गया,

मेरे सिर पे, साँवरिया का, हाथ आ गया

जब जब, विपदा आई,,,,,,,,,,,,,,,,,

दिल दे दिया है, दर्द ले लिया है,

साँवरे से प्रेम किया है l

मेरे दिल की, दवाई, मेरा श्याम करे,

पप्पू शर्मा, कमाई, तेरे नाम करे

जिसने प्रेम किया है, उसका भात खा गया,

मेरे सिर पे, साँवरिया का, हाथ आ गया

जब जब, विपदा आई,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।