वधाई है यशोदा वधाई हो वधाई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वधाई है यशोदा वधाई हो वधाई

यशोदा तुम्हे लख लख वधाई हो वधाई

लाल युग युग जिए नन्द रानी

चाँद तारे गाये सदा इस की कहानी

इश्वर ने तेरी भी गोदी सजाई है

वधाई है यशोदा वधाई हो वधाई

है कितना प्यारा तेरा लाल यशोदा

सारे जग से न्यारा तेरा लाल यशोदा,

फूलो से भी कोमल तेरा लाल यशोदा

चंदा से भी चंचल तेरा लाल यशोदा

एसी छवि पेहले कभी थी न दिखाई है

वधाई है यशोदा वधाई हो वधाई

गोल गोल मुखड़ा कही लागे न नजरियाँ

चाँद का है टुकड़ा कही लागे न नजरियाँ

उचा चोडा माथा कही लागे न नजरियाँ

रूप सब को भाता कही लगे न नजरियाँ

लटे काली घुंगराली बदली सी छाई है

वधाई है यशोदा वधाई हो वधाई

सवाली सुरतिया पे वारि वारि जाऊ

मोहनी मुरतिया पे वारि वारि जाऊ जाऊ

लाल लाल अधरों पे वारी वारी जाऊ

चर्चा तेरे नखरो पे वारी वारी जाऊ

लाल को दे जन्म भुत इतराई है

वधाई है यशोदा वधाई हो वधाई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।