छोड़ो छोड़ो कलाही मेरी नन्द लाला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छोड़ो छोड़ो कलाही मेरी नन्द लाला.

घर जाने को हो रही देरी नन्द लाला

मैं आउंगी मिलने को कल सवेरे नन्द लाला

ठहरो ठहरो अभी न घर जाओ राधे मेरे संग में समय और बिताओ राधे

बुलाती है मेरी बाहे चली मेरी बाहों में आओ मेरी राधे

छोड़ो छोड़ो कलाही मेरी नन्द लाला.

चोरी चोरी मैं मिलने तुमसे आई हु

अपनी सखियों से ना मैं केह के आई हु

हुई जो लेट खुलेगा भेद सोच गबराई हु

ठहरो ठहरो अभी न घर जाओ राधे मेरे संग में समय और बिताओ राधे

नखरे बाजी दिखावे मत राधे रानी,

मेरे संग में तू नच ले होके मस्तानी,

तुम्हारे बिन हमारा दिल उठाये गा परेशानी

छोड़ो छोड़ो कलाही मेरी नन्द लाला.

टेड़े टेड़े नैनो से न घूरो सांवरिया नच नच के कमर को करे चुरो सांवरिया

तेरे संग में प्रेम रंग में ढलो दिन पुरो सांवरियां

ठहरो ठहरो अभी न घर जाओ राधे मेरे संग में समय और बिताओ राधे

आजा आजा लगा लू तुझे हिवडे में मेरी आंखे न हट ती तेरे मुखड़े से

लगे प्यारी अनाडी को तू ज्यादा चाँद के टुकड़े से

ठहरो ठहरो अभी न घर जाओ राधे मेरे संग में समय और बिताओ राधे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।