उठो उर्मिला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

उठो उर्मिला सूर्ये वंश का लखन तेरे अविनंदन में है

अनुज धर्म की दवजा त्याग कर शीश निभाये वंदन में है

उठो उर्मिला

अंग पाश निद्रा से बीता त्याग उठो न

वर्षो पेहले परहरे नींद में विरहा की चुनड ओह्ड सो गई

सियम है सिंदूर में तेरे परको लाहल चंदन में है

उठो उर्मिला

लुटन प्रये करो परिबाषित पारन पीर का करो सुनेना,

सपन लोक से विदा मांग लो बीत गई सब काली रैना,

प्रीत जो थी बात तुम्हारी भर प्रेम जल नैनं में है

उठो उर्मिला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।