पीले पीले भगती का प्याला

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पीले पीले भगती का प्याला,

और हो जा रे तू मतवाला,

पीले पीले भगती का प्याला,

माँ ही धर्म है और सब का इमान है माँ

ईसा नानक और बुध का अरमान है माँ

ये सारी दुनिया का जिस्म और जान है माँ

गीता रामायण और वेदों का ध्यान है माँ

माहि काशी और माँ ही शिवालया,

पीले पीले भगती का प्याला,

माँ ही ममता ओर सब की खुशहाली माँ,

ये सारी भरी भगियाँ की हरयाली माँ

जमीन से आसमा की सभ की रखवाली माँ,

दर तेरे आया है दास बन सवाली माँ

करदो ऐसा बन जाऊ मैं हिमालया,

पीले पीले भगती का प्याला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।