कृष्ण तुम्हारे ध्यान में आठो पेहर रहा करू

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कृष्ण तुम्हारे ध्यान में आठो पेहर रहा करू

हर दम तुम्हारे ज्ञान के सागर में ही बहा करू

वाणी तुम्हारी हो मधुर मुरली के मीठे मीठे स्वर,

जादू का जिस में हो असर बंसी वही सूना करू

कृष्ण तुम्हारे ध्यान में आठो पेहर रहा करू

मोर मुकट हो पीत पथ कुंडल हो कानो में पड़े,

दर्शन मुझे दिया करो विनती जब मैं किया करू

कृष्ण तुम्हारे ध्यान में आठो पेहर रहा करू

रटना लगी है श्याम अब मुझको तुम्हारे दर्श की,

पडती नही जरा भी कल तुम ही तो हो मैं क्या करू

कृष्ण तुम्हारे ध्यान में आठो पेहर रहा करू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।