बेटा श्रवण पाणीड़ो पिलाय

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॥ पावन पाठ ॥

बेटा शरवण पाणीड़ो पिलाय ,

वन में बेटा प्यास लगी,

आला लीला बांस कटाया ,

कावड़ ली रे बनाय,

मात पिता ने माय बिठाया ,

तीर्थ करवा ने जाय,

बेटा शरवण। ……..

ना कोई है कुआ बावड़ी ,

ना कोई समंद तलाव,

तब शरवन ने मन में सोची ,

कहा जल पाउ मारी माई,

वन में बेटा प्यास लगी।

बेटा शरवण। ……..

ऊचा निचा कदम के ऊपर ,

बगुला उड़ उड़ जाय,

तब सरवन ने मन में धारी ,

अब जल पाउ मारी माई,

वन में बेटा प्यास लगी,

बेटा शरवण। ……..

ले जारी अब शरवन चाल्यो ,

गयो शरवर रे पास,

जाय नीर जकोरियो रे ,

दशरत मारियो शक्ति बाण,

वन में बेटा प्यास लगी,

बेटा शरवण। ……..

दशरत वहा से चालियो रे ,

आयो शरवण रे पास,

है विधाता क्या कर डाला ,

मारियो भांजा रे बाण,

वन में बेटा प्यास लगी,

बेटा शरवण। ……..

मरतो शरवण बोलियों रे ,

सुण मामा मारी बात,

अँधा है मारा मात पिता जी ,

वाने पाणीड़ो पिलाये,

वन में बेटा प्यास लगी,

बेटा शरवण। ……..

ले जारी अब दशरत चाल्यो ,

गयो कावड़ रे पास,

ठंडो जल भर लायो जारी ,

अब जल पियो मारी माई,

वन में बेटा प्यास लगी,

बेटा शरवण। ……..

नहीं शरवण की बोली कहिजे ,

नहीं शरवण की चाल,

मात पिता तो स्वर्ग सिधारिया ,

दशरत ने दिनों वठे श्राप,

वन में बेटा प्यास लगी,

बेटा शरवण पाणीड़ो पिलाय ,

वन में बेटा प्यास लगी,

अजय जांगिड़ खूड़ 8058333070

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।