इक तमना है जीवन की निधि वन रात बिताऊ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इक तमना है जीवन की निधि वन रात बिताऊ

समाने श्याम हॉवे फिर चाहे मैं मर जाऊ,

चाहे मैं मर जाऊ चाहे मैं मर जाऊ,

समाने श्याम हॉवे फिर चाहे मैं मर जाऊ,

निधि वन की सब लता पताये,

देख श्याम को नित हरषाए,

मुझपर मोहन रीज गए तो मैं भी नित हरषाऊ,

समाने श्याम हॉवे फिर चाहे मैं मर जाऊ,

रंग मेहल की छटा सुहाए

रास रसीली सुध बिसराए

युगल छवि हो समाने मेरे पलके न झ्प्काऊ,

समाने श्याम हॉवे फिर चाहे मैं मर जाऊ,

रंग संवारा रूप सलोना

चाहू निधिवन का इक कोना

केवल कोई प्यास रहे न एसी प्यास बुजाऊ

समाने श्याम हॉवे फिर चाहे मैं मर जाऊ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।