चली शिव शम्भु की बरात

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चली शिव शम्भु की बरात है ग्यारा लाख बाराती साथ,

बाँध लिया सर्पो का सेहरा अंग भभूती शिव ने रमा ली

लगा लिया नंदी पे आसन भंग की झोली संग लटका ली

पार्वती से व्याह रचाने चले है भोले नाथ,

चली शिव शम्भु की बरात है ग्यारा लाख बाराती साथ,

वेद मन्त्र पड़ते है भरमा शिव शिव गाये माँ ब्रह्मानी

चवर झुलाए श्री नारायण देख के शिव जाए बलिहारी

लक्ष्मी मैया ने लक्ष्मी की शिव पे करी बरसात

चली शिव शम्भु की बरात है ग्यारा लाख बाराती साथ,

सरस्वती की वीणा बाजी

मंगल काल करे पुरवाई

देव लोक है दे रहा शिव शम्भु को आज वधाई

दिन से भी ज्यदा उजली है देखो आज की रात

चली शिव शम्भु की बरात है ग्यारा लाख बाराती साथ,

भोले के चेलो की टोली हर हर हर महादेव है बोली

आगे आगे देवता सारे पीछे भूतो की रंगोली

दास पवन मुस्काये देख के डमरू शिव के हाथ

चली शिव शम्भु की बरात है ग्यारा लाख बाराती साथ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।