सूना दे जरा मुरली मुरली वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सूना दे जरा मुरली मुरली वाले

बजा दे मुरली मुरली वाले

सूना दे जरा मुरली मुरली वाले

खेले है फूल चम्पा झुही चमेली

कलियों को चूमे तितली मुरली वाले

सूना दे जरा मुरली मुरली वाले

भागो में कूके कोयल डाली डाली

मटका के कमर पतली मुरली वाले

सूना दे जरा मुरली मुरली वाले

पवन चले पुरवा ठंडी ठंडी

है रैना उजली उजली मुरली वाले

सूना दे जरा मुरली मुरली वाले

केहता है बात साँची राज अनाडी,

फिजा है बदली बदली मुरली वाले

सूना दे जरा मुरली मुरली वाले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।