शोभा तुम अपने धाम की प्रभु खुद बड़ा रहे हो

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मंदिर तुम्हारा राम जी तुम ही बना रहे हो

शोभा तुम अपने धाम की प्रभु खुद बड़ा रहे हो ,

भगतो की भ्वानायो का परिषम चडा रहे हो

शोभा तुम अपने धाम की प्रभु खुद बड़ा रहे हो ,

सरयू नदी की लेहरे फिर गुनगुना रही है

श्री राम नामधुन ये जैसे सुना रही है

योगी महनत साधू सब मुस्कुरा रहे है

श्रधा सुमन पिरो कर माला बना रहे है

पूजन तुम्हारी भूमि का तुम ही करा रहे हो

शोभा तुम अपने धाम की प्रभु खुद बड़ा रहे हो ,

जो नाम लिख के पत्थर पानी में थे तराए

वो ही नाम हर शिला पर हम लिख के आज लाये,

हे राम लला हम ने कुछ पुण्ये थे कमाए

जोबन के कार सेवक सेवा के काम आये

चन्दन हमारे प्रेम का मस्तक लगा रहे हो

शोभा तुम अपने धाम की प्रभु खुद बड़ा रहे हो ,

भगतो की आसथा में भीगी ये प्रीत आई,

ये अवध में विशव भर से इक इक जो इत आई,

हर हार को हरा कर देखो ये जीत आई

अपना वचन निभाने रघुकुल की रीत आई

सन्देश हर इक देश को तुम से सुना रहे हो

शोभा तुम अपने धाम की प्रभु खुद बड़ा रहे हो ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।