सोने के सिंगाशन बेठ रहे भगवान है

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जन्म भूमि का हो रहा निर्माण है

तम्बू से सिंगाशन बेठ रहे भगवान है

मंगल भवन अम्ग्ल हरी दवु सुदाश्त्थ अजर बिहारी,

सरयू जी का अब सिद्ध हुआ अस्नान है

सोने के सिंगाशन बेठ रहे भगवान है

राम जन्म जग मंगल हेतु सत्ये संग सूती पालक सेतू,

मंदिर बन ने से आई जान में जान है

सोने के सिंगाशन बेठ रहे भगवान है

जो आंनंद सिन्दू सुख रासी सी करते तिरलोक सुपासी,

खुश नाच रहे अब अनजानी के लाल है

सोने के सिंगाशन बेठ रहे भगवान है

सो सुख धाम राम यश नामा अखिल लोक ध्याक विशरामा,

मेहंत ब्रिज मोहन देवन्दर का राम में ध्यान है,

सोने के सिंगाशन बेठ रहे भगवान है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।