वृन्दावन सो वन नहीं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वृन्दावन सो वन नहीं,

नंदगांव सो गांव!

बंशीवट सो वट नहीं,

कृष्ण नाम सो नाम

राधा मेरी स्वामिनी,

मैं राधे को दास।

जनम जनम मोहे दीजियो,

श्री वृन्दावन को वास।

वृन्दावन के वृक्ष को,

मरम न जाने कोय।

डाल डाल और पात पे

श्री राधे राधे होय।।

राधा राधा कहत ही,

सब बाधा मिट जाय।

कोटी जनम की आपदा,

नाम लिये सों जाय,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।