जय भोले तेरी शरण मैं आई

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय भोले तेरी शरण मैं आई

प्रेम सुधा का प्याला पिया प्रेम की बूटी खाई

जय भोले................

भूतनाथ है रुद्रनाथ है दीननान्थ है भोला

गले सर्प है रुण्ड माल है बाघम्बर है चोला

जय भोले................

शम्भू महेश्वर जय कैलाशी खट्वांगी गंगाधर

कृपा निधि अज शिवप्रिया भाव भूतपति है जटाधर

जय भोले................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।