ये रिश्ते प्यार के कही छुट न जाए

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

राखी है त्यौहार ख़ुशी का दिल से इसे मनाये

भाई बहिन के प्यार का गुलशन खुशियों से महकाए,

ये रिश्ते प्यार के कही छुट न जाए,

ये रिश्ते प्यार के कही टूट न जाए,

मात पिता के चमन के भूटे सदा रहे लहराते

इक दूजे को बड़े चाव से प्यार की दे सोगाते,

ये गुल गुजार के कही रूठ न जाए

ये रिश्ते प्यार के कही छुट न जाए,

जब तक गंगा वहे प्यार की गगन में चाँद सितारे

तब तक चमन न प्यार का सूखे रूठे नही बहारे

ये सुख संसार के कोई लुट न जाए

ये रिश्ते प्यार के कही छुट न जाए,

राखी बाँध के बेहना लेती सो सो बार बलाए ,

सदा रहे परिवार सुखी बस मांगे यही दुआए,

ये पुष्प बहार के कही टूट न जाए

ये रिश्ते प्यार के कही छुट न जाए,

राखी के दिन भाई चाव से बहिन की राह निहारे

केवल शिकवे गिले मिटा के बेहन से खुशियाँ वारे,

ये मोती हार के कही छुट न जाए

ये रिश्ते प्यार के कही छुट न जाए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।