तेरी भक्ति में खो जाँऊ मेरे भोले भंडारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जी करता है दर पे आँंऊ शिव शंकर त्रिपुरारि

तेरी भक्ति में खो जाँऊ मेरे भोले भंडारी .

जी करता है दर पे आँंऊ शिव शंकर त्रिपुरारि

तेरी भक्ति में खो जाँऊ मेरे भोले भंडारी

जब तू मुझे बुलायेगा मैं भांग लेकर आउंगा

जब तू मुझे बुलायेगा...

जब तू मुझे बुलायेगा मैं भांग लेके आउंगा

मैं भांग लेके आऊंगा मैं तुझको भांग चढाउंगा

मैं तुझको भोग लगाउंगा

भांग तुझे है सबसे प्यारी शिव शंकर त्रिपुरारि

तेरी भक्ति में खो जाँऊ मेरे भोले भंडारी

जब तू मुझे बुलायेगा मैं डमरू लेके आउंगा

जब तू मुझे बुलायेगा...

जब तू मुझे बुलायेगा मैं डमरू लेके आउंगा

मैं डमरू लेके आऊंगा धुन डमरू की सुनाउंगा

मैं डमरू खूब बजाउंगा

डमरू की धुन बड़ी ही प्यारी शिव शंकर त्रिपुरारि

तेरी भक्ति में खो जाँऊ मेरे भोले भंडारी

जब तू मुझे बुलायेगा तेरी महिमा के गुण गाउंगा

जब तू मुझे बुलायेगा...

जब तू मुझे बुलायेगा तेरी महिमा के गुण गाउंगा

तेरी महिमा के गुण गाउंगा मैं सबको यही सुनाउंगा

मैं सबको यही बताउंगा

तेरी महिमा सबसे भारी शिव शंकर त्रिपुरारि

तेरी भक्ति में खो जाँऊ मेरे भोले भंडारी

जी करता है दर पे आँंऊ शिव शंकर त्रिपुरारि

तेरी भक्ति में खो जाँऊ मेरे भोले भंडारी

जी करता है दर पे आँंऊ शिव शंकर त्रिपुरारि

तेरी भक्ति में खो जाँऊ मेरे भोले भंडारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।