दादी सती तेरे धाम पै बड़े गूंज रहे जयकारे

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हे दादी शती तेरे धाम पै बड़े गुंज रहे जयकारे

जो एकबै तेरे दर पै आता

खाली झोली कभी ना जाता

वो दिन दिन मोज उड़ाता बड़े अच्छे चलैं गुजारे ---

नूंण दाल जो आकै चढावै

दादी शती की टहल पुगावै

फेर दादी शती पल भर मै करदे सै वारे न्यारे -----

तेरे री धाम की शौभा न्यारी

चौगरदे नै खिली फुलवारी

लाखों किस्मत से हारे तनै पकड़ कै हाथ उभारे---

विजय शर्मा तेरा लाडला बेटा

सब डाला तनै भरदिआ पेटा

महीपाल हे दादी शती जी बस गुण गावै सै थारे ---

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।