मन में है ठाना अय्धोया है जाना

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मन में है ठाना अय्धोया है जाना होता मंदिर का निर्माण है

मंदिर नही वो माँ भारती की अंमित सी पहचान है

सिर को कर उचा बोलो जय जय जय श्री राम

आँखे करोड़ो थी पर एक ही सपना था मंदिर वही बनायेगे राग ये अपना था

सपन सच होगा बोलो जय जय श्री राम

धरती अयोध्या की भी खिल के मुस्काती है

देवी देवो की टोली पुष्प बरसाती है,

भजे ढोल ताशे बोलो जय जय श्री राम

आकश में भगवे झंडे हम तो लहराए गे

राम भक्त दुनिया भर से दर्श को आयेगे

संजीव कोहिली संग बोलो जय जय श्री राम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।