भोला भंडारी तो धक धक सूटे चिलम पे चिलम

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोला को भाये न खोया मलाई करते रेहते तंग

भोला भंडारी तो धक धक सूटे चिलम पे चिलम,

पीसत पीत्स हारी गोरा पीते जाए भंगिया,

तन पे बस्म रमा कर बैठे माने ना ही बतियाँ

चिलम चिलम पे चदाये भोला करते रेहते तंग

भोला भंडारी तो धक धक सूटे चिलम पे चिलम,

भोले नाथ न कॉफ़ी पीते ना पीते वो चाय

ना माने ना माने मोसे भोले चिलम चड़ाये

नंदी भी झूमे भोले भी झूमे झूमे गले में बुजंग

भोला भंडारी तो धक धक सूटे चिलम पे चिलम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।