ब्रज गोपिन तोरी लेऊँ बलैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ब्रज गोपिन तोरी लेऊँ बलैया,

बड़भागी सब रास सुख पावत,

क्रीड़त संग जाके कृष्ण कन्हैया,

ब्रज गोपिन तोरी----------

जाय कोऊ घर थाट बजावत,

कोऊ घर जाय चरावत गईया,

ब्रज गोपिन तोरी----------

करत कोऊ घर माखन चोरी,

पकड़त जाय छुड़ावत मईया,

ब्रज गोपिन तोरी-----------

बलिहारी हरि पुनि पुनि जाऊँ,

मोरे मुरलीधर जग सृष्टि रचैया,

ब्रज गोपिन तोरी-----------

रचना आभार: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।