हैवान जमाना है बेबस हर नारी है

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हैवान जमाना है बेबस हर नारी है,

सदियों से यही क्यों माँ नारी ये बेचारी है,

बन कर के माँ दुर्गा बन कर के महाकाली

अवतार दोबारा लो करने माँ रखवाली

औरत है संकट में बस आस तुम्हारी है,

सदियों से यही क्यों माँ नारी ये बेचारी है,

कभी लुटा अपनों ने कभी बेचा गैरो ने

कभी बांधा गया जबरन घुंगरू माँ पैरो में

औरत ही हर युग में हारी बस हारी है ,

सदियों से यही क्यों माँ नारी ये बेचारी है,

सीने में दर्द भरा आँखों में पानी है

चुप चाप सहें हर गम कैसी जिन्ग्दानी है

हस्ते हुए सहती है एसी दुखयारी है,

सदियों से यही क्यों माँ नारी ये बेचारी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।