गुरुवर दया के सागर

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गुरुवर दया के सागर, तेरा दर जगत् से न्यारा ॥

दुनियाँ का दर भँवर है,॥ तेरा दर ही है किनारा,

गुरुवर दया के सागर, तेरा दर जगत् से न्यारा ॥

तेरी दृष्टी है निराली, दुविधा को हरने वाली ॥

अन्धों की आँख में भी, नव ज्योति भरने वाली ॥

अज्ञान के तिमिर से,॥ हर भक्त को उबारा,

गुरुवर दया के सागर, तेरा दर जगत् से न्यारा ॥

तेरा है ज्ञान चोखा, विज्ञान है अनोखा ॥

अपनाया इसे जिसने, उसने न खाया धोखा ॥

जो जुड़ सका न तुझ से,॥ वह लुट गया बेचारा,

गुरुवर दया के सागर, तेरा दर जगत् से न्यारा ॥

तेरे दर पे सब बराबर, कोई बड़ा न छोटा ॥

चोखा बनाया सबको, आया भले ही खोटा ॥

जो भी शरण में पहुँचा,॥ सबको मिला सहारा,

गुरुवर दया के सागर, तेरा दर जगत् से न्यारा ॥

दुनियाँ का रस लुभाता, मझधार में डुबाता ॥

तेरा-रस पुनीत पावन, है इष्ट से मिलाता ॥

भक्तों को इसी रस ने,॥ भव सिन्धु से उबारा,

गुरुवर दया के सागर, तेरा दर जगत् से न्यारा॥

दुनियाँ का दर भँवर है,॥ तेरा दर ही है किनारा,

गुरुवर दया के सागर, तेरा दर जगत् से न्यारा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।