भगवान बचा लो आ कर के

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॥ पावन पाठ ॥

भगवान बचा लो आ कर के अब और सहारा कोई नही

अब तेरे सिवा इस दुनिया में प्रभु और हमारा कोई नही

जीवन की नैया दुभ रही प्रभु पार लगाने आ जाओ,

दहशत के घोर अँधेरे में अब राह दिखाने आ जाओ

अब सिवा तुम्हरे हे इश्वर कही और किनारा कोई नही

भगवान बचा लो आ कर के अब और सहारा कोई नही

छाया है कैसा सननाटा भिखरी है कैसी खामोशी

ना जाने कब ये कट जाए डोरी चलती इन सांसो की

प्रभु तुम दुखियो के साथी हो हम सा दुखीयारा कोई नही

भगवान बचा लो आ कर के अब और सहारा कोई नही

माना के खताये की हम ने और पाप किये अनाये किये

दुनिया को दिखाने को नीचा सो यत्न हजार उपाए किये

अब मात से भागा फिरता हु

प्रभु हम सा बिचारा कोई नही

भगवान बचा लो आ कर के अब और सहारा कोई नही

संकट में है सारी दुनिया है नाथ बचा लो आ कर के

गम की अंधियारी खाई से दातार बचालो आ कर के

हम गिरे काली अंधियारों से दीखता उजियारा कोई नही

भगवान बचा लो आ कर के अब और सहारा कोई नही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।