ओ भैया प्यारे रोये राखी का धागा

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॥ पावन पाठ ॥

ओ भैया प्यारे रोये राखी का धागा ओ भैया कहा है तू आजा ,

ये बेहना याद करे आजा

ओ भैया प्यारे रोये

कैसे वेकीरो ने रीत बनाई

बेटी ही है क्यों पराई

खेले दोनों बचपन में संग संग एक ही आंगन में

बेहना रानी थी भैया राजा

ओ भैया प्यारे रोये

पेहले तो तू मिलने आता था अपनी बेहन से हमेशा,

अब क्यों भूल गया मुझको के बेहना याद करे तुझको

भैया आजा तू आजा आ जा

ओ भैया प्यारे रोये

आजा तू भैया राखी बंधाने तुझको कसम है बहिन की

झर झर बेहते है अनसु भैया कब आएगा तू आजा जन्मो का है नाता,

ओ भैया प्यारे रोये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।