जय हो देवो का सरताज

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

सब से पेहलेया थाणे मनावा जय हो देवो का सरताज

गुंद गुदाना सुन्द सुंडाला लम्बोदर महाराज जय हो देवो का सरताज

गंगा जल से अस्नान करावा केसर चन्दन तिलक लगावा

रंग बिरंगा फुलदा लाया वा सजा सजा थाणे पहनावा,

रिधि सीधी थारे संग में सोहे रंतभवर महाराज

जय हो देवो का सरताज

कानो में तेरे कुंडल सोहे हाथो में थारे परसों सोहे

मुसन की असवारी थारे नैना में काजलियो सोहे

चोंकी पर सिंगासन जा पर बेठेया हे घनराज

जय हो देवो का सरताज

नाचा गावा भजन सुनावा झूम झूम कर थाणे रिजावा

मोदक को थारे भोग लगावा हिल मिल कर थारा गुण गावा

लम्भोधर घज बदन विनायाक राखो माहरी लाज

जय हो देवो का सरताज

अनधन में प्रभु वरकत देवो विद्या में बड़ा निपुण हो

सब देवा में बड़ा बनावो नाम घ्जानंद पा ही गये हो

दूर करो प्रभु कष्ट हे सारा आओ घ्जानंद आज

जय हो देवो का सरताज

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।