भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुन राजा अब त्याग दे झूठा मान घुमान

दो दिन के सब ठाठ है दो दिन की ये शान

भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी

दाम बिना निर्धन दुखी तृष्णा वश धन वान

कहू न सुख संसार में सब जग देखा चान

भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी

सर्व नाश के मूल है ये सब भोग विलास खारे पानी से भुजे कब अमृत की प्यास

भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी

कल राजा कोई और था कल होगा कोई और सदा किसी के शीश पर कभी रहे न मान,

भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी

कोई तेरे पाप का भाग न बाँटन हार पश्तायेगा मोत जब आएगी द्वार

भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।