बेहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है

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॥ पावन पाठ ॥

बेहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है

प्यार की दो तार से संसार बाँधा है

रेशम की डोरी से संसार बाँधा है

बेहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है

सुन्दरता में कन्हियाँ है ममता में यशोदा मैया है

वो और नही दूजा कोई वो मेरा राजा भैया है

बेहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है

मेरा फुल है तू तलवार है तू मेरी लाज का पेहरे धार है तू

मैं अकेली कहा इस दुनिया में मेरा सारा संसार है तू

बेहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है

हमे दूर बले किस्मत कर दे अपने मन से न जुदा करना

सावन के पावन दिन भैया भेहना को याद किये करना

बेहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।