हम तुम्हारे थे प्रभु जी

जया किशोरी जी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुम हमारे थे प्रभुजी, तुम हमारे हो

तुम हमारे ही रहोगे, हो मेरे प्रीतम॥

हम तुम्हारे थे प्रभुजी, हम तुम्हारे हें

हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रीतम॥

तुम्हें छोड़ सुन नन्द दुलारे

कोई न मीत हमारो ॥

किस्के दुआरे जाएँ पुकारूँ

और न कोई सहारो ॥

अब तो आके बाहाँ पकड़ लो, ओ मेरे प्रीतम

तुम हमारे थे प्रभुजी, तुम हमारे हो

तुम हमारे ही रहोगे, हो मेरे प्रीतम

हम तुम्हारे थे प्रभुजी, हम तुम्हारे हें

हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रीतम

तेरे कारण सब जग छोड़ा,

तुम संग नाता जोड़ा… प्यारे ॥

एक बार प्रभु बस ये कहदो,

तू मेरा में तेरा … प्यारे ॥

साँची प्रीत कि रीत निबादो, ओ मेरे प्रीतम

तुम हमारे थे प्रभुजी, तुम हमारे हो

तुम हमारे ही रहोगे, हो मेरे प्रीतम

हम तुम्हारे थे प्रभुजी, हम तुम्हारे हें

हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रीतम

दास कि बिनती सुनलीजो,

ओ व्रिज राज दुलारे॥

आखरी आस यही जीवन कि,

पूरण करना प्यारे॥

एक बार हृदय से लगालो, ओ मेरे प्रीतम

तुम हमारे थे प्रभुजी, तुम हमारे हो

तुम हमारे ही रहोगे, हो मेरे प्रीतम

हम तुम्हारे थे प्रभुजी, हम तुम्हारे हें

हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रीतम

तुम हमारे ही रहोगे, हो मेरे प्रीतम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।