मेरे भोले बाबा जटाधारी शम्भू

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे भोले बाबा जटाधारी शम्भू

हे नीलकंठ त्रिपुरारी हे शम्भु

नंदी की सवारी है गौरा मैया साथ है

डोर ये जीवन की तेरे ही हाथ है

सर्पों की गल में माला है पहने तन पे छाला है

तन पे भस्म रमाते हैं महाकाल कहलाते हैं

तीनो लोक तुझसे पावन हे दयालु हे शम्भू

मेरे भोले बाबा..................

भूतों की सेना है भूतनाथ कहते हैं

रास रचा संग कान्हा के बन जाते हैं

जो भी दर पे आता है झोली भर ले जाता है

मन इच्छा फल पाटा है तेरे ही गुण जाता है

तीनो लोक तुझसे पावन हे दयालु हे शम्भू

मेरे भोले बाबा..................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।