अवधपुरी जाने को जी चाहता है

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

अवधपुरी जाने को जी चाहता है

अवधपुरी जाने को जी चाहता है,

राम राम गाने को जी चाहता है,

अवधपुरी जाने को.........

अवधपुरी में सरयू महारानी,

सरयू महारानी श्रीसरयू महारानी,

गोता लगाने को जी चाहता है,

अवधपुरी जाने को.........

अवधपुरी में बजरंगी का डेरा,

बजरंगी का डेरा रामसंगी का डेरा,

दरस सुख पाने को जी चाहता है,

अवधपुरी जाने को .........

अवधपुरी में रामजी बिराजैं,

रामजी बिराजैं श्रीरामजी बिराजैं,

चरणरज पाने को जी चाहता है,

अवधपुरी जाने को ........

जादू भरे मेरे रामजी के नयना,

रामजी के नयना श्रीरामजी के नयना,

नयना लड़ाने को जी चाहता है,

अवधपुरी जाने को.........

मंद मधुर मुस्काये मेरे रामजी,

मुस्काये मेरे रामजी मुस्काये श्रीरामजी,

सबकुछ लुटाने को जी चाहता है,

अवधपुरी जाने को.........

भव से पार उतारैं मेरे रामजी,

उतारैं मेरे रामजी उतारैं श्रीरामजी,

उन्ही में समाने को जी चाहता है,

अवधपुरी जाने को जी चाहता है,

अवधपुर जाने को.............

रचना आभार: ज्योति नारायण पाठक

वाराणासी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।