मेरी नैया लगादे पार

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी नैया लगादे पार साईं शिर्डी वाले,

तेरे हाथो में पतवार साईं शिर्डी वाले,

मेरी नैया लगादे पार साईं शिर्डी वाले,

गेहरा है सागर बाबा लेहरो का शोर है

गिरी है तूफानों में और आंधियो का जोर है,

जाए दुभ न ये मजधार साईं शिर्डी वाले

मेरी नैया लगादे पार साईं शिर्डी वाले,

छोड़ दी नैया मैंने तेरे ही सहारे पे

बन के खावैयाँ तुही लगाये गा किनारे पे,

तुझपर है मुझे इतवार साईं शिर्डी वाले,

मेरी नैया लगादे पार साईं शिर्डी वाले,

मैं हु कमजोर मेरा दिल कमजोर है

मेरी जिन्दगी की बाबा तेरे हाथ डोर है,

मेरी विनती कर सवीकार साईं शिर्डी वाले

मेरी नैया लगादे पार साईं शिर्डी वाले,

बिना तेल बाती तूने दीप जलाए है

डूबते बचाए लाखो पार लगाये है,

कुछ दास पे कर उपकार साईं शिर्डी वाले,

मेरी नैया लगादे पार साईं शिर्डी वाले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।