बड़ा ही पावन है मन भावन

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - हमदम मेरे मान भी जाओ....

बड़ा ही पावन , है मन भावन श्रावण का सोमवार है,

कालो के ये ,वो महाकाल है पूजे जिन्हें संसार है,

मस्तक पर है चंद्रमा , बहे गंगा की धारा,

तन पे भस्मी रमाये है , पहने बाघम्बर प्यारा

सर्पो का हार है , दिव्य श्रंगार है

कानो में बिछु के कुंडल , हाथो में डमरू की ढमकार,

बड़ा ही पावन , है मन भावन....

खोल खजाने बेठे है , मेरे महाकाल सरकार

मांगना है जो माँगलो , है जिनको जो दरकार

शिव भोले दानी है , दुनिया दीवानी है

दिलबर शैलू को संग ले , आया आज तेरे दरबार

बड़ा ही पावन , है मन भावन....

।। सिंगर शेलेन्द्र मालवीया ।।

इंदौर म.प्र .

।। रचना - दिलीप सिंह सिसोदिया ।।

" दिलबर " नागदा म.प्र.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।