अब दुख जाए न सहा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हार गया मैं अब दुख सह के अब न रहा हिम्मत मेरे तन में,

आ जाओ है मेरे प्रभु जी अब न रहना इस जग में,

अब दुख जाए न सहा प्रभु मुझे कर दो रिहा

जिसको मैं अपना कहा वो नही मेरा है,

पीछे जो मुड़ के देखा घोर अंधेरा है,

निर्बल मन है डरा

खड़ा हूँ मैं जिस जग में बहुत बखेड़ा है,

काम क्रोध लोभ आ के चाहु दिस घेरा है,

हार के मैं तुमसे कहा,

किस मुह से दयानिधि तेरे पास आउ मैं

अपनी ही करनी पे रो रो पछताओ मैं।

"फनि" तो कही का न रहा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।