मुझको ये विस्वाश है मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मुझको ये विस्वाश है मैया तू मेरा दुःख टाले गी

देख के मेरी आंख में आंसू मुझको गले लगा लेगी,

मेरी ज्योतावाली माँ ...

मैं क्या तुझको भेट करू अब कुछ भी मेरे पास नही,

अपने दिल से पुछ के कह दे क्या मैं तेरा दास नही,

आया हु ये सोंच के तू चरणों में मुझे बिठा लेंगी

कोई आस नही दुनिया से और दुनिया तो बेगानी है,

दर्द ही दर्द है मेरे दिल में और आँखों में पानी है,

सारे जग ने ठुकराया है तू मुझको अपना लेंगी

करुना का सागर देखा है मैंने तेरी निगाहों में,

चलते चलते हार गया हु मैं जीवन की राहो में

तू ही मुझे सहारा देगी तू ही मुझे सम्बाले गी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।