घनश्याम तुझे ढूंढने जाएं कहाँ कहाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

घनश्याम तुझे ढूंढने जाएं कहाँ कहाँ ,

अपने विरह की याद दिलाएं कहाँ कहाँ .

तेरे नजर में जुल्फ में मुस्कान मधुर में ,

उलझन है सबमें दिल तो छुड़ाए कहाँ कहाँ ,

घनश्याम तुझे ........

चरणों की खाक सारों में खुद खाक बन गए,

अब खाक पे हम खाक रमाये कहाँ कहाँ ,

घनश्याम तुझे........

जिनकी तमीज देख के खुद बन गए मरीज,

ऐसे मरीज मर्ज दिखाए कहाँ कहाँ ,

घनश्याम तुझे.......

दिन रात अश्रु बिंदु बरसते तो हैं मगर ,

सब तन में लगी आग बुझाए कहाँ कहाँ ,

घनश्याम तुझे ढूंढने जाएं कहाँ कहाँ ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।