हे गोरा रानी घुमादु तुझको मेला हरिद्वार का

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे गोरा रानी घुमादु तुझको मेला हरिद्वार का,

देखो रंग चडा भगतो पे शिव चोद्स त्यौहार का,

ओ भोले स्वामी कैसे मैं देखू मेला हरिद्वार का

हम को भोले बचा बचा जाने ये संसार का,

हे गोरा रानी घुमादु तुझको मेला हरिद्वार का,

ना भोले तेरे पास है गाडी नंगे पैर हमारे,

चलते चलते थक जाउंगी भोले संग तुम्हारे,

तुम जोगन बन जाना मैं जोगी बन जाऊ,

तुम नंदी की करो सवारी और ,मैं पैदल जाऊ,

गोरा जाके देख नजारा रिम झिम की बरसात का,

हे गोरा रानी घुमादु तुझको मेला हरिद्वार का,

क्या खाए गे क्या पीयेगे भोले जरा बता दे,

अपने साथ में क्या क्या रख लू भोले तू समजा दे,

मेरे लिए तो सुल्फा गांजा भांग घोट के धर ले,

हलवा पूरी खीर परांठे अपने खातिर धर ले,

इनके साथ तू रख ले तू टुकड़ा एक अचार का,

हे गोरा रानी घुमादु तुझको मेला हरिद्वार का,

गणपति कार्तिक छोटे छोटे कैसे धीर धरे गे,

काहा गए है मम्मी पापा दोनों शोर करेगे,

मैं समजाऊ उन दोनों को जल्दी हम आ जाए गे

लाडू मेवा और बता सब मेला से सब लायेगे,

सेवा करे जो दीनदुखी की रहे न दुःख संसार का,

हे गोरा रानी घुमादु तुझको मेला हरिद्वार का,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।