आंबे जगदम्बे तेरी जय हो भवानी माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आंबे जगदम्बे तेरी जय हो भवानी माँ

जग्जनी मैया मेरी रखना सिर पर हाथ भवानी

पर्वत ऊपर माँ तेरा है पावन दरबार,

माँ दुर्गा बेठी याहा कर के सिंह सवार,

तीन लोक नो खंड में ना कोई ऐसा द्वार,

रहे जगत जनी याहा भाहे करुना की धार,

लाल चुनर बिंदियाँ तेरी मेहँदी हाथ की लाल

भगतन हित माँ सेहज सहज दुशमन को विकराल,

जब आये संकट कोई जाते हो सब हार,

ऋषि मुनि और देवता तुमसे करे पुकार,

मधुप कतब दानव करे इस जग में उत्पाद,

जाने सारे भक्त और मरे तुम्हरे हाथ,

शुंभ निशुभ ने ना सुनी देवो की ललकार,

तुमने ही उन का किया मैया जी संघार ,

अग्नि पवन वायु धरा और पंचम आकाश,

सब तेरे आधीन माँ सब में तेरा वास

करे भगत जो आरती अगर कपूर

भर देती भण्डार माँ होते संकट दूर,

तेरी किरपा से जागा माँ मन में ये विश्वाश,

रश्मी भी गाने लगी लिखने लगा सुभाष,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।