ऊबो थारी हाजरी बजाऊं मावड़ी बोल कुण सो भजन सुनाऊं मावड़ी

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ऊबो थारी हाजरी बजाऊं मावड़ी ,

बोल कुण सो भजन सुनाऊं मावड़ी ।

बोल कुणसी सेवा निभाउँ मावड़ी,

बोल तन्ने की कर रिझाऊं मावड़ी ||

भाव भजन म्हारे समझ ना आये,

भाव में तो हिवड़ो भर-भर आये |

बोल कितना आँसुड़ा बहाऊँ मावड़ी,

बोल तन्ने की कर रिझाऊं मावड़ी ||

हर्ष भरूं या सिणगार मैं गाऊं,

किन विधि थारा वारणा उतारूँ ।

शब्द के सिणगार के सजाऊँ मावड़ी,

बोल तन्ने की कर रिझाऊं मावड़ी ||

तन-मन-धन दादी तेरो है,

कुछ भी नहीं प्रभु मेरो है ।

चरणां में भेंट के चढाऊँ मावड़ी,

बोल तन्ने की कर रिझाऊं मावड़ी ||

तेरे बिना लागे जग सुना ,

तेरे बिना कुछ भाये ना ।

तू ममता की मूरत मैया ,

हर बेसहारा की सहारा तू मैया ॥

मैं तेजस सेवा थारी जानू ,

जनम जनम उपकार यू मानु ।

दादी दादी नाम बस गाऊ मावड़ी

बोल तन्ने की कर रिझाऊं मावड़ी ॥

बोल कुणसी सेवा निभाऊं मावड़ी ।

बोल तन्ने की कर रिझाऊं मावड़ी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।