पावन तेरा द्वार है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले हम तेरे दर पे आयेगे चरनो में सिर झुकायेगे,

तू मुझे थाम लेंगा ये इतवार है

पावन तेरा द्वार है,

हो सिर पे है गंगा गले में बुज्न्गा माथे पे चंदा सजाये हुए

तुझको है प्यारी नंगी सवारी

हाथो में डमरू उठाये हुए

कर लिया भस्म से तूने शिंगार है,

पावन तेरा द्वार है,

मांगू न सोना मांगू न चांदी

हमे तेरी भगती प्यारी लगे,

पर्वत के वासी सुन केलाशी छवि सारे जग से न्यारी लगे,

तू मेरा मैं तेरा बस ये इकरार है,

पावन तेरा द्वार है,

हो अविनाश आके सिर को जुका के तेरा नाम लेकर गाने लगा है,

अब तो बिसरियां मेरी ये नैया खुद मेरा शंकर चला ने लगा है,

बिन तेरे कुछ नही सुना संसार है,

पावन तेरा द्वार है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।