मेरे गूर जी का अद्भुत शिवाला

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे गूर जी का अद्भुत शिवाला जो भी आये वो जाए निहाला.

जब दुभ रही थी कश्ती मेरी तब मिल न रहा था किनारा,

मैंने देखा गुरु जी का द्वारा,

मुझ को मिल गया तेरा सहारा तेरे दर मिलता प्रारेम का निवाला

मेरे गूर जी का अद्भुत शिवाला जो भी आये वो जाए निहाला.

डरती मैं गुरु जी इस दुनिया में

तेरे रहमत ने अपना बनाया,

मर गई थी मैं अपनी नजर में

तूने जीने का शोंक जगाया,

भटके राही कोई मिलता उजाला,

मेरे गूर जी का अद्भुत शिवाला जो भी आये वो जाए निहाला.

खुशियाँ मिलती है तेरे दर पे आके,

नही ये मिलती कही और जाके याहा मिलता है खुशियों का खजाना,

तभी तो आता है पूरा जमाना,

मेरे गूर जी का अद्भुत शिवाला जो भी आये वो जाए निहाला.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।