गले नाग लिपट रहे काले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गले नाग लिपट रहे काले,

मैं जीयु कैसे डर डर के ओ मेरे भोले,

ये नाग किसी से नही लड़ ते,

तू मान ले यकीन कर के मेरी गोरी

तू भांग रात दिन पिए,

मैं घोट घोट हार गई ओ मेरे भोले,

मैं आप ही भांग घोट लू,

तू बोल मत हार गई मेरी गोरी,

तूने डम डमरू भ्जाया,

तो ठंडी ये हवा आ गई मेरे भोले,

तेरी छम छम पायल बाजी,

तो काली ये घटा चाह गई मेरी गोरी,

हो आई कैसी ये बिमारी ये दुखी नर नार हो गए मेरे भोले,

हुई जैसी जग की प्रजा ये

ऐसे ही करतार हो गए मेरी गोरी,

क्या गलती है इनकी बता दे

बोलो तो कुछ केलाशी मेरे भोले

ये खुद को ही खुदा समजते ,

बदल गए सन्यासी मेरी गोरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।