छोड़ेंगे ना हम तेरे साथ ओ दादा मरते दम तक

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॥ पावन पाठ ॥

मरते दम नहीं, अगले जनम तक,

अगले जनम नहीं, सात जनम तक,

सात जनम नहीं, जनम जनम तक,

छोड़ेंगे ना हम तेरा साथ ओ दादा, मरते दम तक ।

प्रकट प्रभावी दादा मेरे, सबके दुखड़े मिटाते,

खाली झोली जो भी लाता, झोलीया तुम भर देते ।

झोली खाली भरती देखी, तेरी कृपा दादा सबपे बरसती,

नाम जपु तेरा, अंत समय तक ॥

छोड़ेंगे ना हम तेरा साथ ओ दादा, मरते दम तक..

रोती हुई आंखों को दादा, तुने हंसना सिखाया,

इस दुनियां में हारे हुए को, तुने गले से लगाया ।

तेरे दर्श को जी ललचाता, भक्त ये दादा तेरी महिमा गाता,

भक्ति करू तेरी, वाणी हैं जब तक ॥

छोड़ेंगे ना हम तेरा साथ ओ दादा, मरते दम तक..

इस धरती पर प्रकट हुए प्रभु, सबका भाग्य जगाने,

नित्यानंद ने प्रभु से मिलाया, हो गए इनके दीवाने ।

गुरु ने सबको राह दिखाई, तेरी महिमा सबने हैं गाई,

धाम बने तेरा इस धरती पर ॥

छोड़ेंगे ना हम तेरा साथ ओ दादा, मरते दम तक..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।