साईं दियां साडे उते बड़ी मेहरबानियाँ

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे अंग अंग विच साईं मेरा बोल्दा

मेरे लई भंडारे सदा साईं मेरा खोल्दा

कितियाँ ने माफ़ मीथो होइया जो नदानियाँ,

साईं दियां साडे उते बड़ी मेहरबानियाँ,

मेरे अंग अंग विच साईं मेरा बोलदा,

दिल दिया रावा विचो साईं मेरा लंगेया

अपने ही रंगा विच साईं मेनू रंगेया

मिल गया साईं कोलो जो भी कुछ मन्गेया,

खुल गए नसीब मेरे दिल च समा गया,

जदों दा साईं मेरा घर मेरे आ गया,

होइया जो मेरे नाल गला ने सुनानियाँ

साईं दियां साडे उते बड़ी मेहरबानियाँ,

गलियां दे कखा वांगु जदों असी होए सी

अपनी गरीबी उते असी बड़ा रोये सी

दुखा वाली माला विच असि गए परोए सी

मिल गई अमीरी ते गरीबी दूर गई है

जदो दिया साईं साड़ी वाह फड लई है

साईं ने जो कितियाँ ने गल्ला ने सुनानिया,

साईं दियां साडे उते बड़ी मेहरबानियाँ,

सोना जेहा मुख ओहदा रूप श्री राम दा

हथ विच मुरली रूप घनश्याम दा चड गया नशा मेनू भगती दे याम दा,

किते होए गुनाह मेरे सारे माफ़ हो गए

करमा दे खाते सारे सफा हो गए,

जदों दिया साईं दियां लिखियाँ कहानियां,

साईं दियां साडे उते बड़ी मेहरबानियाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।