हे गोविंद हे गोपाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हे गोविंद हे गोपाल हे दयाल लाल,

प्राणनाथ अनाथ सखे दीन दरद निवार,

हे समरथ अगम पूरन मोह मया धार,

अंध कूप महा भयान नानक पार उतार,

ਹੇ ਗੋਵਿੰਦ ਹੇ ਗੋਪਾਲ ਹੇ ਦਯਾਲ ਲਾਲ,

ਪ੍ਰਾਣਨਾਥ ਅਨਾਥ ਸਖੇ ਦੀਨ ਦਰਦ ਨਿਵਾਰ,

ਹੇ ਸਮਰਥ ਅਗਮ ਪੂਰਨ ਮੋਹ ਮਯਾ ਧਾਰ,

ਅੰਧ ਕੂਪ ਮਹਾ ਭਯਾਨ ਨਾਨਕ ਪਾਰ ਉਤਾਰ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।