गोदी में राम लाला

पारंपरिक
श्री गणेश भजन राम भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गोदी में राम लाला अखियो में पानी

राम जी को लेके चली और चाल रानी,

बाल रूप प्रभु दर्शन ऐसे माँ की गोदी कुवर हो जैसे,

तीन लोक में जिनकी माया उन पर है आँचल की छाया

कुवर गणेश लगे कोश्याला शानी

राम जी को लेके चली और चाल रानी,

पल पल छीन छीन बीते ऐसे तो युग पुरे कटे ये कैसे,

त्रेता युग बन भेज दियां था,

कलसहित मन ये पाप किया था

राम बिन कठिन है इक घड़ी बितानी

राम जी को लेके चली और चाल रानी,

बिलख करे सब अवध निवाशी जाने नही है सिन्धु सुख रासी

सुनी हुई है अयोध्या मोरी

विनती करत तुम तुमसे कर जोरी

हो ना अधीर धीर धरो संत ग्यानी

दोनों नगर में रहे राम की राजधानी,

राम जी को लेके चली और चाल रानी,

मुख मयंक शीतला एसी दीन बंधू तीनो के हितेषी

मुख मंडल जो ॐ परकाशा धाम और का कर ही निवासा,

लेते आशीष याहा धीर पीर ग्यानी

राम जी को लेके चली और चाल रानी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।