तेरो लाल यशोदा छल गयो री

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरो लाल यशोदा छल गयो री

मेरो माखन चुरा कर बदल गयो री

मैंने चोरी से इसे मटकी उठाते देखा

आप कहते हुए औरो को खिलते देखा

नाच कर घूम कर कुछ नीचे गिरते देखा

माल चोरी का इसे खूब लुटाते देखा

मेरे मुह पर भी माखन मेल गयो री

तेरो लाल यशोदा छल गयो री

हाथ आता ही नहीं दूर दूर रहता है

चोर है चोर ये चोरी में चूर रहता है

चोरी कर के भी सदा बेक़सूर रहता है

सर पे शैतानी का इस पे फितूर रहता है

मेरे माखन की मटकी उदल गयो री

तेरो लाल यशोदा छल गयो री

हस कर मांगता है और कभी रोता है

अपने हाथो से दही आप ही बिलोता है

ये दिन पे दिन भला क्यों इतना हटी होता है

न दो तो धुल में लौटता और सोता है

मेरो आँचल पकड़ कर मचल गयो री

तेरो लाल यशोदा छल गयो री

इसे समझ दे यशोदा ये तेरा बेटा है,

चोर ग्वालो का एक ये ही चोर नेता है,

मार पड़ती है और ये मजा लेता है

इसके बदले में जरा बंशी बज देता है,

जाया मोती कान्हा की शरण गयो री,

तेरो लाल यशोदा छल गयो री

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।