जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है।

क्यों भटकूँ गैरों के दर पे तेरा दरबार काफी है॥

नहीं चाहिए ये दुनियां के निराले रंग ढंग मुझको,

निराले रंग ढंग मुझको

चली जाऊँ मैं खाटू जी तेरा श्रृंगार काफी है

जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है

जगत के साज बाजों से हुए हैं कान अब बेहरे

हुए हैं कान अब बेहरे

कहाँ जाके सुनूँ बंशी

कहाँ जाके सुनूँ बंशी मधुर वो तान काफी है

जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है

जगत के रिश्तेदारों ने बिछाया जाल माया का

बिछाया जाल माया का

तेरे भक्तों से हो प्रीति

तेरे भक्तों से हो प्रीति श्याम परिवार काफी है

जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है

जगत की झूटी रौनक से हैं आँखें भर गयी मेरी

हैं आँखें भर गयी मेरी

चले आओ मेरे मोहन

चले आओ मेरे मोहन दरश की प्यास काफी है

जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है

क्यों भटकूँ गैरों के दर पे तेरा दरबार काफी है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।