प्रभु मेरी नैया पार

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु मेरी नैया पार उतारो

मैं डूबट हु मज्धारो,

प्रभु मेरी नैया पार

भव सागर जल दुष्टर भारी सुजत ना ही किनारों,

भीच समंधर घोटे खावे बिन केवट मज्धारो,

प्रभु मेरी नैया पार

लम्भी लेहर उठे पल पल में नही चल छल अधारो,

परवल पवन चले निष् बासर चहु जिस घोर अंधियारों,

प्रभु मेरी नैया पार

हाथ पैर में जोर न मेरे नही कोई संग संगारो,

भरमा नन्द भरोसो तेरो अब नही देर विचारों,

प्रभु मेरी नैया पार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।