न घुट ती तेरी भांग ये दोनों हाथ जुड़ा ले ने

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रे धने गजब का मोसम गोरा भांग पीला दी ने

न घुट ती तेरी भांग ये दोनों हाथ जुड़ा ले ने,

मेरी नर्म नर्म ये कलाई भोले कुछ तो दया कर ले,

रे सावन सावन नही दया च जी कर ला करले,

अछाना घना भोले तू मन समजा ले ने ,

न घुट ती तेरी भांग ये दोनों हाथ जुड़ा ले ने,

रोज की आद्दत से बहाना क्यों ले रेहा सावन का

रे जान गया तेरा आज जी कर रहा नाठन का,

तने सेवा कर्ण की कही थी याद तू कर ले बाटी ने,

न घुट ती तेरी भांग ये दोनों हाथ जुड़ा ले ने,

रे टप टप बूंद पड़े गोरा झूमन ने जी कर रेहा से

छाले पड़ गे हाथा में बस ताने कही सर रेहा से,

भांग धोटने की भोले तू मशीन मंगा ले

न घुट ती तेरी भांग ये दोनों हाथ जुड़ा ले ने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।